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“दिल बेचारा” में जब आखिरी बार हंसाते-रूलाते जिंदगी का पाठ पढ़ा गए सुशांत

कोरोना के चलते सुशांत की फिल्म भले ही सिनेमा हॉल नहीं पहुंची लेकिन अब इस फिल्म ने हर घर में पहुंचकर सुशांत की आवाज को हर घर में गूंजा दिया है.

‘एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए खत्म कहानी’ ये है सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ की कहानी. काफी इंतजार के बाद आख़िरकार सुशांत की फिल्म ‘दिल बेचारा’ देश-विदेश के दर्शको में एक साथ OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज कर दी गई है.

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) और संजना सांघी (Sanjana Sanghi) ‘दिल बेचारा (Dil Bechara)’ की कहानी उनके करोड़ों फैन्स के दिलों को छूने वाली है. वहीं अगर एक्टिंग की बात करें दोनों पूरी तरह से खरे उतरे हैं, और उन्होंने हर इमोशंस को बखूबी पेश भी किया है.

यह फिल्म सुशांत की आखिरी फिल्म है. फिल्म देखते-देखते आपको यह महसूस होता रहेगा कि ये जो शख्स स्क्रीन पर कभी हंसा रहा है तो कभी रूला रहा है वो हमारे बीच नही है. उसकी कोई भी फिल्म भविष्य में नहीं आएगी.

सुशांत ने मैनी के किरदार के हर रंग को जिस तरह से निभाया है, उसे आप बिल्कुल मिस नहीं कर सकते. सुशांत जैसे एक्टर को खोना बॉलीवुड के लिए बहुत बड़ा नुकसान है यह बात आपको फिल्म देखने के बाद बिल्कुल समझ आएगी. सुशांत के अलावा, संजना सांघी, स्वास्तिक मुखर्जी, शाश्वता और साहिल वेद ने अपने काम से पूरी तरह प्रभावित किया है.

स्पेशल रोल में सैफ अली खान पूरी तरह जंचे हैं. और डायरेक्टर के रूप में मुकेश छाबड़ा छाप छोड़ने में बिल्कुल कामयाब रहे हैं. एआर रहमान ने हमेशा की तरह शानदार म्यूजिक से फिल्म को सजाया है. फिल्म को पूरी तरह देसी टच से सजाया गया है, और ये सभी के दिल को छू कर निकल जाती है. फिल्म पूरी तरह इमोशन और हल्की-फुल्की कॉमेडी पर आधारित हैं.

फ़िल्म के आखिरी पल पूरी तरह से झकझोर कर रख देते हैं.बता दे कि ये फ़िल्म लोकप्रिय नवलिस्ट जॉन ग्रीन की book ‘दा फाल्ट इन आवर स्टार्स’ पर आधारित है.कोरोना के चलते सुशांत की फिल्म भले ही सिनेमा हॉल नहीं पहुंची लेकिन अब इस फिल्म ने हर घर में पहुंचकर सुशांत की आवाज को हर घर में गूंजा दिया है.

माना कि आज सुशांत हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी जिंदादिली हमे खुश रहने का मौका दे रही हैं. फ़िल्म में ये भी कहा गया है कि किसी के मरने के बाद उसके चाहने वाले खूब रोते हैं, अकेले रह जाते हैं और दुख में जिंदगी बिताते हैं. लेकिन रियल लाइफ में भी जब आज सुशांत हमारे बीच नहीं है तो क्या उनके जाने के बाद हम इमोशनल होकर सिर्फ रोएंगे? ये तो गलत हो जाएगा. इसलिए हमे बिना भावुक हुए उनकी जिंदादिली को अपने दिल में हमेशा के लिए जिंदा रखना है.

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