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राजस्थान : गहलोत सरकार पर फिर से मंडराए संकट के बादल , पायलट गुट को हाई कोर्ट से बड़ी राहत !

केंद्र सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया है. हाई कोर्ट ने प्लीडिंग कंप्लीट करने के बाद जल्दी सुनवाई का प्रार्थना पत्र लगाने के लिए निर्देश दिए.

पिछले कुछ हफ्तों से राजस्थान (Rajsthan) में जारी सियासी घमासान के बीच एक बार फिर से अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पायलट गुट को राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने स्पीकर सीपी जोशी (CP Joshi) के नोटिस पर स्टे लगा दिया. सचिन पायलट और उनके 18 समर्थक विधायकों की सदस्यता पर फ़िलहाल कोई ख़तरा नहीं है.मामले में अब नोटिस जारी रहेंगे, लेकिन विधानसभा स्पीकर कार्रवाई नहीं कर सकेंगे.

बता दे कि हाईकोर्ट के फ़ैसले से तकरीबन 11 घंटे पहले पायलट और उनके गुट ने केंद्र को इस मामले में पार्टी बनाने की याचिक दायर की थी उन्होंने इसके लिए तर्क दिया था कि यह संवैधानिक संशोधन को चुनौती है इसलिए इसमें केंद्र एक पक्षकार के तौर पर होना चाहिए.केंद्र सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया है. हाई कोर्ट ने प्लीडिंग कंप्लीट करने के बाद जल्दी सुनवाई का प्रार्थना पत्र लगाने के लिए निर्देश दिए.

दरअसल ये सियासी टकरार तब शुरू हुई जब से पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली के नज़दीक मानेसर के होटल में गए. वहीं, अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने जयपुर के एक पांच सतारा होटल में डेरा डाला.सीएम गहलोत के खिलाफ बगावत करने के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री पद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया.

तो वहीं दूसरी ओर राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने सचिन पायलट और उनके गुट के 18 विधायकों की “सदस्यता रद्द क्यों न कर दिया जाए” इसको लेकर नोटिस जारी किया. सचिन पायलट और उनका गुट पार्टी की दो बैठकों से ग़ायब रहे थे.

स्पीकर के नोटिस के ख़िलाफ़ सचिन पायलट का गुट राजस्थान हाईकोर्ट गया. हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि वो 24 जुलाई को फ़ैसला सुनाएगा. साथ ही हाईकोर्ट ने स्पीकर सीपी जोशी से कहा कि वो शुक्रवार शाम 5.30 बजे तक कोई फ़ैसला न लें.

स्पीकर सीपी जोशी भी सुप्रीम कोर्ट गए. उन्होंने इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की जगह सुप्रीम कोर्ट में करने की अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को फ़ैसला देने से रोकने से इनकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में ‘असंतोष की आवाज़’ को दबाया नहीं जा सकता.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी फ़ैसला आएगा उस पर वो 27 जुलाई को सुनवाई करेगा.

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