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आखिर बिहार में दुबारा लॉकडाउन से क्या होने वाला है फ़ायदा ?

राजधानी पटना मे भी 7 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था जो 16 जुलाई को समाप्त हो रहा था. परन्तु पिछले लॉकडाउन से सरकार ने क्या हासिल किया?, इस पर सवाल अब भी बना हुआ है. सरकारी आदेश में ये भी साफ़ नहीं है कि इस बार के लॉकडाउन से सरकार क्या फायदा होने वाला है ?

 

बिहार में 14 जुलाई से पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया है, बता दें कि बिहार गृह विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार राज्य, जिला, अनुमंडल और अंचल मुख्यालय के साथ नगर निकाय इलाकों में पूरी तरह लॉकडाउन जारी है. वहीं इस लॉकडाउन में बिहार में बस सेवा पर रोक लगा दी गई है, लेकिन मालवाहक गाड़ियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के निजी वाहन के परिचालन पर कोई रोक नहीं है.

बिहार लागू लॉकडाउन के दौरान राशन, किराने, दूध, फल, सब्जी, मांस – मछली की दुकानो को खोलने की अनुमति है वहीं स्वास्थ्य से जुड़े मेडिकल स्टोर को खोलने की इजाज़त है. बैंक, इंश्योरेंस, पेट्रोल पम्प खुले रहेंगें तो टैक्सी और ऑटो रिक्शा पर भी रोक नही है.

बता दें कि अनलॉक 1 के दौरान धार्मिक स्थलों को खोल देने के बाद एक बार फिर धार्मिक स्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया है. साथ ही होटल और रेस्टोरेंट को कुछ शर्तों के साथ खोलने की रियायत दी गई है. इसके अतिरिक्त स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम भी खुले रहेंगे है, लेकिन वहां दर्शकों को जाने की इजाजत नहीं है.

गौरतलब है कि 22 मार्च से मई तक चार बार लॉकडाउन के बाद 8 जून से केन्द्र के निर्देश के अनुसार राज्य में लॉकडाउन को कुछ शर्तों के साथ हटा दिया गया था. लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के ख़तरे के मद्देनजर बिहार राज्य के कई जिलों में स्थानीय प्रशासन ने अपनी आवश्यकता के अनुकूल कुछ दिनों का लॉकडाउन लगाया था. राजधानी पटना मे भी 7 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था जो 16 जुलाई को समाप्त हो रहा था.
परन्तु पिछले लॉकडाउन से सरकार ने क्या हासिल किया?, इस पर सवाल अब भी बना हुआ है. सरकारी आदेश में ये भी साफ़ नहीं है कि इस बार के लॉकडाउन से सरकार क्या फायदा होने वाला है ?

बिहार में जारी इस लॉकडाउन को लेकर तामम सवाल खड़े हो रहे हो रहे हैं. अब तक स्पष्ट तौर पर देखा गया है की बिहार सरकार स्वास्थ्य संरचना कोरोना के इन बढ़ते संक्रमण से लड़ने में नाकाम ही रही है. ऐसे में बिहार में सरकार ने 16 से 31 जुलाई तक कम्प्लीट लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया है.

वहीं बात करें बिहार के ग्रामीण इलाकों की तो 16 से 31 जुलाई तक लगने वाले लॉकडाउन से गांव को बाहर रखा गया है. क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती किसानी के काम में कोई मुसीबत नहीं होगी. लेकिन गांव नए तरीके की चुनौती का सामना कर रहे है.

बता दें कि बिहार के गांवों में रहने को ये चिन्ता सता रही है कि बाहर से आने वालों लोगों की न ही कोई जांच हो रही है न ही उन्हें क्वारन्टीन में रखा जा रहा है. ऐसे में गांव वालों को ये चिंता सता रही है कि बाहर से आने वाले संक्रमित है या स्वस्थ है. ऐसे में गांव वाले चाहते हैं कि उनको किसी सुरक्षित स्थान पर रखने का प्रबंध सरकार को करना चाहिए ताकि गांव में कोरोना का संक्रमण न फैले. क्योंकि गांव में वायरस फैल गया तो बहुत बदतर स्थिति होगी. क्योंकि बिहार के गांवों में मेडिकल सुविधाएं भी बहुत मुश्किल से उपलब्ध होता है. उल्लेखनीय है कि बीती 15 जून से क्वारंटीन सेंटर भी बिहार सरकार ने बंद कर दिए थे.

बीते 5 दिनों की राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकडों के अनुसार 11 जुलाई को 9108, 12 जुलाई को 9251, 13 जुलाई को 9129, 14 जुलाई को 10018, 15 जुलाई को 10052 सैंपल की जांच हुई. यानी जांच लगातार बढ़ रही है.

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय कई मौके पर जांच की रफ्तार बढ़ाने की बात करते रहे है. खुद स्वास्थ्य महकमे ने 20 जून तक ही जांच की क्षमता 10 हजार करने का लक्ष्य रखा था, जिसको 14 जुलाई को पाया जा सका. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के अनुसार, “बिहार में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. 441 कोविड केयर सेंटर और 74 केयर सेंटर बनाए गए है.

 

इसके अतिरिक्त 4 डेडिकेटड कोविड अस्पताल -एन एम सी एच(पटना), एन एम सी एच (गया), एम्स(पटना), जे एल एन एम सी एच(भागलपुर) बनाए गए है. साथ ही अनुमंडल अस्पतालों में भी कोरोना सैंपल लेने की व्यवस्था हो रही है ताकि ग्रामीण स्तर पर जांच की सुविधा मुहैया कराया जा सके.” हालांकि राज्य में जांच दर बढ़ रही है, लेकिन इस जांच में लापरवाही के मामले सामने आ रहे है.

बिहार के रिकवरी रेट को देखे तो 11 से 15 जुलाई के आंकड़ो के मुताबिक रिकवरी रेट लगातार घट रही है. राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकड़े देखे तो 11 और 12 जुलाई को ये 73 फीसदी थी, जो 13 जुलाई को ये घटकर 71 फ़ीसदी, 14 जुलाई को 69 और 15 जुलाई को 67 फीसदी हो गई. इसके साथ ही प्रतिदिन होने वाली की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.

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