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राजस्थान में सियासी हलचल हुई तेज, क्या यहां दोहराई जा रही एमपी की कहानी?

सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें खूब लग रही है कि कहीं पायलट भी दोस्त सिंधिया की राह न पकड़ लें. पूरे सियासी घटनाक्रम पर पायलट की तरफ से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है.

 

कोरोना संकट के बीच कांग्रेस शासित राजस्थान (Rajasthan Political Crisis) में अचानक सियासी हलचल बहुत तेज हो चुकी है. राज्यसभा चुनाव के बाद से राजस्थान में शुरू हुआ सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. खरीद-फरोख्त की आशंकाओं के बीच सीएम गहलोत सरकार बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

सीएम और युवा डेप्युटी सीएम के बीच खींचतान की चर्चाएं, युवा नेता का दिल्ली में डेरा डालना, कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में नहीं रहना आदि ने कांग्रेस के चिंताएं बढ़ा दी है.

सब कुछ करीब-करीब वैसा ही जैसा 4 महीने पहले कांग्रेस शासित राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था और आखिरकार कमलनाथ सरकार गिर गई थी. ऐसे में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की धड़कनों का बढ़ना लाजिमी है कि कहीं उनका भी हश्र कमलनाथ जैसा न हो अर्थात उनकी भी सरकार गिर ना जाए.

आपको याद दिला दे कि 4 महीने पहले मध्य प्रदेश में जो कुछ हुआ और आज राजस्थान में जो कुछ हो रहा है, उनमें बहुत कुछ समान है. तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा कराकर कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था. विधायकों को पहले गुड़गांव और बाद में बेंगलुरू के होटल में ठहराया गया था. कमलनाथ के सामने तब युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे तो अब गहलोत के सामने युवा डेप्युटी सीएम सचिन पायलट हैं.

राजस्थान के डेप्युटी सीएम सचिन पायलट 3 दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस के 24 विधायक शनिवार रात से ही गुड़गांव के ही मानेसर में एक बड़े होटल में रुके हुए हैं. कई विधायकों के मोबाइल फोन स्विच्ड ऑफ हैं. चर्चा तो यह भी है कि डेप्युटी सीएम बीजेपी के संपर्क में हैं.सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें खूब लग रही है कि कहीं पायलट भी दोस्त सिंधिया की राह न पकड़ लें. पूरे सियासी घटनाक्रम पर पायलट की तरफ से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीजेपी पर विधायकों की खरीदफरोख्त कर अपनी सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं, तो बीजेपी ठीक वैसे ही इसे कांग्रेस की आपसी खींचतान बता रही है, जैसे 4-5 महीने पहले मध्य प्रदेश के सियासी संकट पर बोल रही थी. गहलोत का दावा है कि विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये का लालच दिया जा रहा है.तो वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की आपसी गुटबंदी से ध्यान भटकाने की कवायद करार दे रही है.

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