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कानपुर: हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस, अपराधियों संग मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मियों की मौत

पुलिस टीम के पहुंचते ही अपराधियों ने छतों से दनादन फ़ायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 8 पुलिस वाले मारे गए. मरने वालों आठ लोगों में एक डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र, तीन सब इंस्पेक्टर और चार कॉन्स्टेबल हैं. घटना के बाद एसएसपी और आईजी मौक़े पर तैनात हैं. कानपुर की फ़ोरेंसिक टीम इस मामले की जाँच में जुटी है. साथ ही एसटीएफ़ भी लगा दी गई है. 6 जख्मी पुलिस वालों को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. जिसमे से एक पुलिसकर्मी की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है.

 

गुरुवार देर रात कानपुर में विकास दुबे तथा कुछ और अपराधियों को पकड़ने गई पुलिस की टीम पर ज़बर्दस्त हमला हुआ जिसमें पुलिस के आठ जवानों की मौत हो गई हैं तथा सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हुई है. अपराधियों को पकड़ने गई टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग में एक डीएसपी की भी मौत हो गई हैं. घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है.

इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी का कहना है कि कानपुर के एक नामी अपराधी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के यहां छापा मारने के लिए पुलिस चौबेपुर थाना क्षेत्र के दिकरू गांव में गई थी. पुलिस को रोकने के लिए अपराधियों ने पहले से ही तैयारी के तहत जेसीबी लगाकर रास्ते को रोक दिया था.

पुलिस टीम के पहुंचते ही अपराधियों ने छतों से दनादन फ़ायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 8 पुलिस वाले मारे गए. मरने वालों आठ लोगों में एक डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र, तीन सब इंस्पेक्टर और चार कॉन्स्टेबल हैं. घटना के बाद एसएसपी और आईजी मौक़े पर तैनात हैं. कानपुर की फ़ोरेंसिक टीम इस मामले की जाँच में जुटी है. साथ ही एसटीएफ़ भी लगा दी गई है. 6 जख्मी पुलिस वालों को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. जिसमे से एक पुलिसकर्मी की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है.

जानकारी के अनुसार विकास दुबे पर 60 मुक़दमे दर्ज हैं और पिछले दिनों कानपुर के राहुल तिवारी नाम के व्यक्ति ने उन पर 307 का एक मुकदमा दर्ज कराया था. उसी सिलसिले में पुलिस विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए उनके गांव बिकरू गई थी जहां पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई.

अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर गुरुवार आधी रात के बाद बदमाशों ने हमला कर दिया. हमले के दौरान “घरों की छत से पुलिस पर गोलियां से फायरिंग की गईं. उस दौरान पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महानिदेशक जयनारायण सिंह, पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच कर पुलिस बल के साथ गांव की घेराबंदी किए हुए हैं और गांव में सर्च ऑपरेशन जारी है.पुलिस के अनुसार विकास दुबे से संपर्क रखने वाले सौ से अधिक लोगों के फ़ोन को सर्विलांस पर लगा दिया गया हैं. कानपुर नगर के अतिरिक्त कानपुर देहात और कन्नौज ज़िलों से भी पुलिस बल को बुलाया गया है.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने और तत्काल मौक़े की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

बता दें कि जिस विकास दुबे को पुलिस गिरफ़्तार करने गई थी, उन पर कई अपराधों के संगीन आरोप है साथ ही दर्जनों मुक़दमे भी दर्ज हैं. विकास दुबे का तालुक राजनीतिक दलों से हैं. फिलहाल विकास दुबे के ख़िलाफ़ कुल साठ मुक़दमे दर्ज हैं. इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर मुक़दमे भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक जिस मामले में पुलिस विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई थी वह हत्या से जुड़ा मामला था और विकास दुबे उसमें नामज़द हैं.

यही नहीं “साल 2001 में विकास दुबे पर थाने के अंदर जाकर बीजेपी के राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या करने का आरोप भी लगा था. मालूम हो कि संतोष शुक्ला की हत्या एक हाई प्रोफ़ाइल हत्या थी. इतनी बड़ी वरदात होने के बावजूद भी किसी पुलिस वाले ने विकास दुबे के विरूद्ध गवाही नहीं दी. कोर्ट में विकास दुबे के ख़िलाफ़ कोई पुख्ता सबूत नहीं पेश किया जा सका जिसके कारण वह छूट गया.

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