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कोविड19: दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात से गृह मंत्री ने किया इनकार, फिर क्यों हो रहे हैं ये तीन टेस्ट

गृह मंत्री अमित शाह से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने एक इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ ? तो उन्होंने अपने जवाब में इस बात से साफ इनकार कर दिया कि दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है.

 

देश के गृह मंत्री अमित शाह से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने एक इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ ? तो उन्होंने अपने जवाब में इस बात से साफ इनकार कर दिया कि दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है. यही नहीं उन्होंने एएनआई को दिए गए इंटरव्यू में यह भी कहा कि मैंने ने कम्युनिटी ट्रांसमिशन के बारे में आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो. बलराम भार्गव, नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल और एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया से बात की है. और इन तीनों का कहना है कि दिल्ली में कोरोना महामारी के तीसरे चरण यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में नहीं पहुंचा है.

लेकिन इन सब बातों के बाद ऐेसे सवाल उठ रहे है कि दिल्ली में क्यों कराए जा रहे हैं सीरोलॉजिकल टेस्ट? क्या सीरोलॉजिकल टेस्ट और कम्युनिटी ट्रांसमिशन का आपस में कोई लिंक हैं ?हालांकि कम्युनिटी स्प्रेड की पड़ताल में वैज्ञानिक इस तरह के टेस्ट करते है जिसे सेरो सर्वे भी कहा जाता है, जिसे वैज्ञानिक बहुत अहम मानते हैं.

गौरतलब हो कि दिल्ली में 25 जून को फैसला किया गया कि यहाँ 20 हजार लोगों का सीरोलॉजिकल टेस्ट कराया जाएगा. और दिल्ली में सीरोलॉजिकल टेस्ट की शरुआत शनिवार यानी 27 जून से हो चुकी है. जिसके तहत पहले दिन लगभग 677 सैम्पल लिए गए. और रविवार को लगभग 2000 और लोगों के ब्लड सैम्पल टेस्ट किए गए. बता दें कि 10 जूलाई तक दिल्ली में इस टेस्ट को पूरा करने की बात कही गई है.

अब बात करते हैं की आखिर ये सीरोलॉजिकल टेस्ट करते कैसे है? तो आम तौर पर कोविड19 के लिए टेस्ट में नाक और गले से स्वैब निकाला जाता और फिर RT-PCR जांच किया जाता है. इसके रिजल्ट आने में लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है. और रिजल्ट आने के बाद तय होता है कि व्यक्ति को कोविड है या नहीं है. वहीं राजधानी में इस दौरान कई तरह के कोविड टेस्ट एक साथ किए जा रहे हैं. उनमें से एक तो RT-PCR टेस्ट है.

इसके अतिरिक्त दूसरा टेस्ट है एंटीजन टेस्ट. इस टेस्ट की शुरुआत 19 जून से दिल्ली में हुआ है. ये टेस्ट लगभग RT-PCR टेस्ट की ही तरह होता है. इस टेस्ट के जरिए शरीर के एंटीजन का जांच किया जाता है. ये टेस्ट ब्लड टेस्ट के द्वारा किया जाता है, और इसका परिणाम आधे घंटे में ही आ जाता है. यानी एंटीजन टेस्ट में रिजल्ट RT-PCR से जल्दी आते हैं.

दिल्ली में शनिवार (27 जून ) से सीरोलॉजिकल टेस्ट शुरू किया गया है. सीरोलॉजिकल टेस्ट मतलब एक तरह का ब्लड टेस्ट है जो व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडीज की पहचान करता है. इस टेस्ट के बारे में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड डॉ. एसपी बायोत्रा का कहना है कि ब्लड में से अगर रेड ब्लड सेल को निकाल दिया जाए, तो जो पीला पदार्थ बचता है उसे सीरम कहते हैं, और इस सीरम में उपस्थित एंटीबॉडीज़ से अलग-अलग बीमारियों की पहचान के लिए अलग-अलग तरह का सीरोलॉजिक टेस्ट किया जाता है. सीरोलॉजिकल टेस्ट में एक बात कॉमन होती है और वो ये है कि ये सभी इम्यून सिस्टम द्वारा बनाए गए प्रोटीन पर फोकस करते हैं. शरीर का यह इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी तत्वों द्वारा शरीर पर किए जा रहे आक्रमण को रोकता हैं और आपको बीमार होने से बचाता है.

एंटीजन टेस्ट की बात करें तो एंटीजन बीमारी का कारण है और एंटीबॉडी बीमारी के कारण से उत्पन्न होता है. पहला कॉज़ है और दूसरा इफेक्ट. डॉक्टर बायोत्रा के अनुसार ये भी एक ब्लड टेस्ट ही हैं. लेकिन जिनका एंटीजन टेस्ट पॉज़िटिव आता है वो कोरोना से संक्रमित है. लेकिन कोविड19 के सीरोलॉजिकल एंटीबॉडी टेस्ट में पॉज़िटिव पाए जाने का मतलब होता है कि वह व्यक्ति पहले कभी कोरोना से संक्रमित रहा होगा,और अब स्वस्थ हो गया होगा.

डॉक्टर ने इस टेस्ट के बारे में आगे बताया है कि यदि एक परिवार में एक ही व्यक्ति कोरोना पॉज़िटिव पाया जाता है, तो एंटीजन टेस्ट के माध्यम ये जानकारी प्राप्त किया जा सकता है कि परिवार के बाकी सदस्य कोरोना संक्रमित है ? इस बात का पता एंटीजन टेस्ट से लगाया जा सकता है. इस तरह से उन्हें आइसोलेट और क्वारंटीन करने में सहायता मिलेगी.

वहीं सीरोलॉजिकल एंटीबॉडी टेस्ट जे जरिए से ये पता लगाया जा सकता हैं कि क्या परिवार के दूसरे किसी सदस्य को पहले कभी कोविड19 हुआ था? जैसे कभी परिवार में किसी को हुआ हो और वो स्वस्थ्य भी हो गया हो और उसमें लक्षण ना पाए गए हों, लेकिन उसने परिवार के दूसरे सदस्य में कोरोना संक्रमण फैल गया हो.

बता दें कि दिल्ली में ये टेस्ट नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और दिल्ली सरकार मिल कर रहे हैं. ये सर्वे करने के लिए सरकार आंगनवाड़ी, आशा वर्कर टीचर और नगर निगम के कर्मचारियों की भी सहायता ले रही है. परंतु इसके लिए प्राइवेट लैब्स को अनुमति अभी नहीं मिली है.

सीरो टेस्ट से इस बात का पता लगाया जा है कि इलाके के कितने फीसदी लोग इस बीमारी को एक्सपोज़ हो चुके हैं – फिलहाल या फिर पहले भी. बता दें कि देश में लगभग 70 ज़िलों में मई में 28 हजार लोगों के सीरोलॉजिकल टेस्ट किए गए थे. उस दौरान दो फीसदी से भी कम लोगों में इस बीमारी के एंटीबॉडीज़ मील थे. इस सर्वे के आधार पर ही आईसीएमआर ने बताया था कि देश में कोविड महामारी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में नहीं पहुंची है.

डॉक्टर बायोत्रा के अनुसार इस टेस्ट का प्रयोग किसी भी इमरजेंसी वाले मरीज़ में कोविड19 का पता लगाने के लिए भी कर सकते हैं. डॉक्टर बायोत्रा के अनुसार इस दौरान ऐसे टेस्ट की आवश्यकता दिल्ली को इसलिए भी है ताकि कंटेनमेंट प्लान में परिवर्तन की कोई गुंजाइश हो या फिर सरकार को अपनी टेस्टिंग की रणनीति में कोई परिवर्तन लाना हो तो तुंरत किया जा सके. कुल मिला कर कोविड 19 के फैलाव को दिल्ली में रोकने के लिए ये टेस्ट बेहद आवश्यक हैं.

फिलहाल राजधानी दिल्ली में इस दौरान इस टेस्ट को कराने के पीछे ख़ास मकसद है. जून माह में कोरोना के मामले दिल्ली में तेजी से बढ़े हैं. जिस पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें लगता है कि दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो गया है. वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर इस बात से साफ इनकार कर दिया है की दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ है. फिलहाल अब सबकी नजर 10 जुलाई को आने सीरोलॉजिकल टेस्ट के नतीजे पर है.

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