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कोरोना का कहर: संक्रमण के मामले में मुंबई से आगे कैसे हो गई दिल्ली ? 

दिल्ली में टेस्टिंग बेहतर हुई है लेकिन ट्रेसिंग और ट्रैकिंग को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं. साथ ही सर्विलांस को लेकर भी कहा जा रहा है कि इसके तरीके को बदलने की जरूरत है.

देश की राजधानी दिल्ली इस वायरस से बुरी तरह प्रभावित मुंबई से आगे निकल गई है. आपको बता दें कि संक्रमण के मामले में मुंबई अब तक दिल्ली से आगे थी. दिल्ली में गुरुवार सुबह के आँकड़ों के मुताबिक़ अब कुल कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 70390 हो गई है जबकि मुंबई में संक्रमण के मामले 69528 हैं.

हालांकि संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में दिल्ली मुंबई से पीछे है और स्थिति बेहतर है.दिल्ली में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 2 मार्च को सामने आया था. जबकि मुंबई में पहला मामला 11 मार्च को आया.

दिल्ली में संक्रमण के मामले बढ़ने को लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यहां टेस्टिंग बढ़ी है जिससे अधिक लोग सामने आ रहे हैं. लेकिन कुछ जानकार इस बात पर सहमत नज़र नहीं आते.

दिल्ली में एंटिजेन रैपिड टेस्टिंग के अलावा कंटेनमेंट ज़ोन में घर-घर जाकर कोरोना टेस्टिंग करने की योजना पर भी काम चल रहा है. माना जा रहा है कि 30 जून तक कंटेनमेंट ज़ोन वाले सभी घरों में स्क्रीनिंग कर ली जाएगी. इसके बाद शहर के बाकी इलाकों में 6 जुलाई तक घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का काम पूरा किया जाएगा.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि ज़्यादा टेस्टिंग होने की वजह से ही दिल्ली में संक्रमित लोग अधिक सामने आ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”अधिक टेस्टिंग हो रही है तो मामले भी अधिक मिल रहे हैं. अगर मुंबई से तुलना करें तो दिल्ली में टेस्ट ज़्यादा हो रहे हैं. मुझे लगता है यही एक वजह है. टेस्ट से पॉजिटिव लोगों का पता चल रहा है और उसी हिसाब से आगे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके.”


हाल ही में दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोगों को होम आइसोलेशन में रखने को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच तकरार दिखी थी. उपराज्यपाल ने आदेश दिया था कि होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को कोविड केयर सेंटर या अस्पताल में भर्ती कराया जाए. दिल्ली सरकार ने इस फैसले का विरोध किया था.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक बार फिर से दिल्ली में कोरोना मरीज़ों के लिए पुराना नियम लागू होगा. इसके साथ ही पिछले छह दिन से चला आ रहा विवाद आज जा कर खत्म हुआ.उन्होंने कहा, ‘अगर किसी को कोरोना पॉजिटिव आता है तो वो घर में ही रहेंगे और एक मेडिकल टीम जाकर उनकी स्थिति का जायजा लेगी”.

अप्रैल महीने की शुरुआत में अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए ‘5-टी’ प्लान तैयार किया था. इसमें टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, टीमवर्क और ट्रैकिंग के जरिए कोरोना को हराने की योजना बनाई गई. हालांकि करीब ढाई महीने बाद दिल्ली में संक्रमण के मामले मुंबई से अधिक हो गए हैं. मुंबई सबसे बड़ा हॉटस्पॉट माना जा रहा था.

दिल्ली में टेस्टिंग बेहतर हुई है लेकिन ट्रेसिंग और ट्रैकिंग को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं. साथ ही सर्विलांस को लेकर भी कहा जा रहा है कि इसके तरीके को बदलने की जरूरत है.

दिल्ली में मरीज़ों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में बेड को लेकर भी सवाल उठे हैं हालांकि सरकार लगातार यह कहती रही है कि पर्याप्त इंतज़ाम किए जा रहे हैं और सरकार कोविड केयर सेंटर बनाकर इस समस्या से निपटने के प्रयास कर रही है.

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