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बिहार : चुनाव से पहले आरजेडी को लगा बड़ा झटका, पांच एमएलसी के पार्टी छोड़ने के बाद चुनाव कैंपेन पर असर पड़ेगा ?

आरजेडी में आए इस भूचाल पर स्थानीय मीडिया ये अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले रघुवंश प्रसाद सिंह भी पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल होने जा रहे हैं

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं. चुनाव की तारीख़ें अभी तय नहीं है लेकिन यहां राजनीति अब करवटें लेने लगी हैं. विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव से ठीक पहले विपक्षी पार्टी राजद में खलबली मच गई है.

मंगलवार को बिहार विधान परिषद की तरफ़ से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक़ आरजेडी के आठ में दो तिहाई यानी पाँच विधान पार्षदों ने एक अलग समूह बनाकर पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और सत्तारूढ़ दल जदयू में शामिल हो गए. कार्यकारी सभापति, विधान परिषद के आदेश से उनके विलय को स्वीकृति भी मिल चुकी है.

आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल होने वाले पाँचों एमएलसी हैं, राधाचरण साह, रण विजय सिंह, दिलीप राय, कमरे आलम और संजय प्रसाद.

इसके अलावा आरजेडी को एक झटका और लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बता दे कि रघुवंश प्रसाद सिंह इस वक़्त कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और पटना स्थित एम्स अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं.

दरअसल रघुवंश प्रसाद सिंह ने पिछले महीने 28 मई को एक ट्वीट भी किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, “बिहार में सत्ता के संरक्षण में अपराध का खेल चल रहा है. राज्य में अपराधी बेख़ौफ़ हो चुके हैं. गोपालगंज में जेडीयू के नेता पुलिस प्रसाशन को खुली चुनौती दे रहे हैं. बिहार में बढ़ते अपराध के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन शुरू होगा और यह आंदोलन सरकार को हटाने तक चलेगा.”

राजद में आए इस भूचाल पर स्थानीय मीडिया ये अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले रघुवंश प्रसाद सिंह भी पार्टी छोड़कर जदयू में शामिल होने जा रहे हैं.

विधानसभा चुनाव को छोड़ भी दें तो रघुवंश प्रसाद के पद छोड़ने का कारण स्पष्ट है. मगर क्या कारण है कि पाँच विधान पार्षदों ने अचानक से पार्टी छोड़ दी.

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव कहते हैं, “इसका कारण नीतीश कुमार ही बेहतर बता सकते हैं क्योंकि पाँचों उनकी पार्टी में ही शामिल हुए हैं. जहां तक बात रघुवंश बाबू के आपत्ति की है तो वे पार्टी में वरिष्ठ हैं और उनकी आपत्ति पर विचार किया जाना स्वाभाविक है. पार्टी ज़रूर विचार करेगी.”

पांचों एमएलसी जिस वक़्त अपना इस्तीफ़ा सौंप कर और जेडीयू में शामिल होने का प्रस्ताव देकर विधान परिषद से बाहर आ रहे थे तब स्थानीय मीडिया को उन्होंने इसका कारण कुछ इस तरह बताया, “नीतीश कुमार जी के 15 साल में किए गए विकास के कामों को देखते हुए हम उनके साथ हुए हैं.”

आरजेडी प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने इसपर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या नीतीश कुमार के विकास के काम उन्हें 15 सालों ‌से नहीं दिख रहे थे? पहले ही क्यों नहीं ऐसा कर लिया?”

स्वाभाविक है कि राजद के पाँच विधान पार्षदों के जदयू में जाने से सत्ताधारी पार्टी को मज़बूती मिलेगी. मगर विपक्ष के लालच देने और साज़िश कर उनकी पार्टी को तोड़ने के आरोप पर जदयू क्या जवाब देगी?
हालांकि, बिहार के विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान अब तक नहीं हुआ है और न ही चुनाव आयोग की तरफ़ से इसे लेकर कोई घोषणा की गई है, लेकिन जैसे-जैसे इस सरकार के कार्यकाल का वक़्त क़रीब आ रहा है, सूबे के सियासी गलियारे में हलचलें बढ़ गई हैं.

इस वक़्त सबका फ़ोकस बिहार विधान परिषद के चुनाव पर शिफ़्ट हो गया है. नौ सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन अंतिम चरण में है. नौ में से तीन सीटें जदयू के खाते में, तीन आरजेडी के खाते में, दो सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में है

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