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दिल्ली-मुंबई में कोरोना को रोकने के लिए सरकार ने बनाई ये नई रणनीति , डॉक्टरों की टीम करेगी डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग !

कई विशेषज्ञों की राय है कि इन दोनों ही जगहों पर कोरोना अब मास स्प्रेड की स्थिति में पहुंच चुका है. मुंबई में कोरोना डेथ रेट को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है.

देशभर में कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. देश में कोरोना के आंकड़े 4 लाख से पार कर चुका है. इस जानलेवा वायरस ने हजारों की जान ले ली है. दिल्ली और मुंबई में कोरोना (corona in india) के नए मरीज चिंता बढ़ा रही है.ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

मुंबई में कोरोना मरीजों की संख्या लगभग सत्तर हजार है और दिल्ली में साठ हजार के पास. कोविड-19 (Covid-19) के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली (Delhi) और मुंबई (Mumbai) ने महामारी से लड़ाई का नया प्लान (New Plan) तैयार किया है.

दोनों महानगरों में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए अलग रणनीति तैयार की गई है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, उपराज्यपाल अनिल बैजल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन के साथ कई राउंड की बैठक की है. इन बैठकों में देश की राजधानी में कोरोना नियंत्रण के लिए कई फैसले किए गए हैं. वहीं मुंबई में अब बिल्कुल अलग तरह की रणनीति तैयार की गई है.

राष्ट्रीय राजधानी में बीते एक पखवाड़े के दौरान तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं. अब दिल्ली में कंटेनमेंट और ट्रेसिंग के प्रयासों पर विशेष जोर दिया जाएगा. मालूम हो कि दक्षिण भारतीय राज्यों केरल और कर्नाटक में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की प्रक्रिया बेहद मजबूत रही है. यही वजह है कि इन दोनों ही राज्यों में कोरोना वायरस के मामले काफी नियंत्रित रहे हैं.

दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में सोशल डिस्टेंसिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिससे संक्रमण दर को कम किया जा सके. संक्रामक रोगों के विशेषज्ञों की मदद लेकर जिला स्तर पर हेल्थ केयर सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाया जाएगा. मास्क न पहनने वालों और सोशल डिस्टेंसिंग न फॉलो करने वाले लोगों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा. ये प्रक्रिया दिल्ली के पुलिस के हवाले होगी.

वहीं मुंबई में अब फोकस उपनगरीय इलाकों की तरफ शिफ्ट हो गया है. मुलुंड, भंडुप, मलाड, अंधेरी, बोरीवली, कांदीवली और दहिसार के इलाकों पर विशेष रूप से फोकस किया जाएगा. इन इलाकों में मोबाइल वैन के जरिए डॉक्टरों की टीम डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग करेगी.

ये टीम लोगों के तापमान सहित अन्य लक्षणों की जांच करेगी. लोगों तक पहुंच बनाने के लिए एनजीओ की भी मदद ली जाएगी. गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों तक खाना पहुंचाने में विभिन्न राज्यों में स्वयंसेवक समूहों की बड़ी भू्मिका रही है.

कई विशेषज्ञों की राय है कि इन दोनों ही जगहों पर कोरोना अब मास स्प्रेड की स्थिति में पहुंच चुका है. मुंबई में कोरोना डेथ रेट को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है. हालांकि इस दौरान एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में मामलों की कम होती संख्या ने आशा जगाई है.

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