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जानिए सूर्य ग्रहण भारत में कब से कब तक रहेगा और कहां-कहां लोग इसका दीदार कर सकेगे ?

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार राजस्थान के सूरतगढ़ और अनूपगढ़, हरियाणा के सिरसा, रतिया और कुरुक्षेत्र, उत्तराखंड के देहरादून, चंबा, चमोली और जोशीमठ तथा कई स्थानों पर ये सूर्य ग्रहण रिंग ऑफ़ फ़ायर यानी 'आग का छल्ला' लगभग एक मिनट के लिए दिखेगा.

 

21 जून यानी आज सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगा है. देश के कुछ हिस्सों में ये वलयाकार दिखेगा, खगोल विज्ञान के जिज्ञासु लोग ‘रिंग ऑफ़ फ़ायर’ या ‘आग के छल्ले’ जैसे सूर्य को देख सकेंगे. लेकिन देश के कई हिस्सों में ये सूर्य ग्रहण आंशिक रूप से ही दिखेगा.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत राजस्थान के घरसाणा में सुबह 10:12 मिनट पर हुआ जिसके बाद ये 11:49 मिनटों पर ये वलयाकार दिखना शुरू होगा और ये राजस्थान में 11:50 बजे समाप्त हो जाएगा.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार राजस्थान के सूरतगढ़ और अनूपगढ़, हरियाणा के सिरसा, रतिया और कुरुक्षेत्र, उत्तराखंड के देहरादून, चंबा, चमोली और जोशीमठ तथा कई स्थानों पर ये सूर्य ग्रहण रिंग ऑफ़ फ़ायर यानी ‘आग का छल्ला’ लगभग एक मिनट के लिए दिखेगा.

बता दें कि देश के अधिकतर जगहों पर लोग सूर्य ग्रहण का आंशिक रूप ही देख सकेंगे. देश के कोलकाता राज्य में बहुत आंशिक तौर सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10:46 पर हो होगा और 2:17 बजे समाप्त हो जाएगा.

वहीं देश की राजधानी दिल्ली में इसकी शुरुआत सुबह 10: 20 बजे होगी और 1:48 बजे समाप्त हो जाएगा. मुंबई में सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10 बजे होगा और दोपहर 1:27 बजे तक समाप्त हो जाएगा.

चेन्नई में सूर्य ग्रह 10:22 बजे से शुरू होकर 1:41 बजे तक समाप्त हो जायेगा तथा बेंगलुरु में ये 10.13 बजे से शुरू होकर 1.31 बजे तक खत्म हो जाएगा.

बता दें कि सूर्य ग्रहण की शुरुआत पहले अफ्रीका महादेश में कांगो में हुई. दुनिया में सबसे पहले अफ्रीका के लोग वलयाकार सूर्य ग्रहण का दीदार किये.

जिसके बाद ये भारत के राजस्थान पहुंचने से पूर्व दक्षिणी सूडान, इथोपिया, यमन, ओमान, सऊदी अरब, हिंद महासागर और पाकिस्तान से होकर गुज़रा है.

भारत के बाद तिब्बत, चीन और ताइवान के लोग इस सूर्य ग्रहण देख सकेंगे. बता दें कि प्रशांत महासागर के बीच जाकर ये सूर्य ग्रहण खत्म हो जाएगा.

आइए जानते हैं कि ग्रहण क्यों लगते हैं सूर्य की परिक्रमा लगाते वक्त पृथ्वी, चांद और सूर्य के मध्य में इस प्रकार आ जाती है कि चांद धरती की परछाई से ढक जाता है. यह तभी होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में बिल्कुल सीधी लाइन में हो. यही कारण है पूर्णिमा वाले दिन सूर्य और चंद्रमा के मध्य धरती आ जाती है जिसकी परछाई चंद्रमा या सूर्य पर पड़ती है.

इससे सूर्य के छाया वाला हिस्सा ढक जाता और वह अंधकारमय रहता है. इस दौरान जब हम पृथ्वी पर से सूर्य को देखते हैं तो वह हिंसा हमें काला नज़र आता है. इसी कारण ग्रहण लगता है. जो चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण कहलाता हैं.

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