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जयपुर में सुबह 7 बजे के करीब गिरा 2.788 किलोग्राम का उल्कापिंड

जांच हुई तो इसके उल्कापिंड होने का खुलासा हुआ. इस उल्का पिंड का भार 2.788 किलोग्राम मापा गया. जिस दौरान ये धातु का टुकड़ा जमीन पर गिरा मिला उस वक्त ये टुकड़ा बेहद गर्म था.

 

जयपुर में आज (शुक्रवार) उस दौरान हलचल मच गई जब कुछ लोगों ने आसमान में बहुत तेज ध्वनि के साथ चमकते हुए तेजी से किसी वस्तु को नीचे धरती की तरफ आते हुए देखा. ये घटना सुबह 7 बजे सांचौर कस्बे के गायत्री कॉलेज के पास घटी है. जिसके लोगों ने कयास लगाया कि आसमान से उल्कापिंड गिरा है.

इसके बाद लोगों से प्रशासन को इस बात की जानकारी दी. जानकारी मिलते ही जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो उन्हें एक धातु का अंश मिला. जो काले रंग का है, काले रंग का ये धातु टुकड़ा धरती में लगभग 4 से 5 फीट की गहराई में गड़ा हुआ था. जब जांच हुई तो इसके उल्कापिंड होने का खुलासा हुआ. इस उल्का पिंड का भार 2.788 किलोग्राम मापा गया. जिस दौरान ये धातु का टुकड़ा जमीन पर गिरा मिला उस वक्त ये टुकड़ा बेहद गर्म था.

उल्कापिंड जब ठंडा गया तो पुलिस ने उसे कांच के एक जार में रखवा दिया है, घटना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने आसमान से चमकते एक टुकड़े को नीचे गिरते देखा. जिस दौरान ये टुकड़ा नीचे गिरा उस समय बहुत तेज धमाका हुआ. इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि आसमान में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए पिंड दिखाई देता है. उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल की भाषा में टूटता हुआ तारा कहा जाता है. ये वहीं उल्कापिंड का टुकड़ा है.

उल्काओं का जो हिस्सा वायुमंडल में जलने से बच जाता है और पृथ्वी पर पहुंचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं. ऐसे अनगिनत उल्कापिंड अक्सर रात में देखे जा सकते हैं लेकिन इनमें से धरती पर गिरने वाले उल्कापिंडों की संख्या बहुत कम होती है. बता दें कि खगोलीय विज्ञान के लिए ये उल्कापिंड बहुत आवश्यक माने जाते हैं. ये बहुत दुर्लभ होने की वजह से आसमान में विभिन्न ग्रहों के संगठन और संरचना से सम्बंधित सूचना हासिल की जाती है.

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