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लॉकडाउन के दौरान 54 दिनों का वेतन न देने वाले उद्योगों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी और कर्मचारी आपस में समझौते से ये मामला सुलझाए. इसमें मामले में राज्य के श्रम विभाग सहायता करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस बीच पूरा वेतन न देने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जायेगी

 

वैश्विक महामारी के चलते देश भर में लगभग 2 महीने से भी अधिक लॉकडाउन था. लॉकडाउन में सारी सरकारी और निजी कंपनियां बंद रही, इस बीच कई कर्मचारियों को ने शिकायत की उनकी कंपनी उनको वेतन नहीं दे रही है. सुप्रीम कोर्ट में लॉकडाउन के 54 दिनों का पूरा वेतन दिए जाने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी. जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार (12 जून) को हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी और कर्मचारी आपस में समझौते से ये मामला सुलझाए. इसमें मामले में राज्य के श्रम विभाग सहायता करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस बीच पूरा वेतन न देने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जायेगी. यानी सुप्रीम कोर्ट ने देश में लॉकडाउन के समय कर्मचारियों को सैलरी दिया न दिए जाने पर निजी कंपनियों के लिए कोई भी आदेश जारी नहीं किया है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने MSMEs समेत अनेक कंपनियों ने इस मामले में कई याचिकाए दायर की थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया, जिसमें लॉकडाउन के 54 दिनों की अवधि के दौरान कर्मचारियों को पूरे वेतन और भुगतान करने के गृह मंत्रालय के आदेश को चुनौती दी गई थी.

गृह मंत्रालय के आदेश को चुनौती देने वाली कंपनियों की याचिकाओं पर जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह की खंडपीठ ने सुनाई की. सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्ते में विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा है. कंपनियों की ओर से यह भी कहा गया कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन उनकी कमर तोड़कर रख दी है. ऐसे में पूरा वेतन देने की बाध्यता उनकी बैलेंस बिगाड़ देगी.

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