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भारत में बड़ी ख़ुशी विभाजन की बलि लेती है.

देश की आज़ादी से लेकर राम मंदिर की खुशी ने रंग में भंग डाला.

भाजपा (BJP) की जन्मभूमि उत्तर प्रदेश नहीं महाराष्ट्र का हौसला था. राम मंदिर संघर्ष की सबसे बड़ी नायक थी शिवसेना (Shivsena), जिसने अपने आक्रामक तेवरों से इस मुद्दे को हिन्दू समाज के दिलो दिमाग में उतार कर भाजपा को फर्श से अर्श तक पंहचाने में सहयोग किया था. इत्तेफाक देखिए कि राम मंदिर के पक्ष में न्यायालय के फैसले के बाद जब राम भक्तों के संघर्ष पर विराम लगा उसके दूसरे ही दिन भाजपा और शिवसेना की राहें अलग हो गयीं
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अयोध्या (Ayodhya) के विवादित ढांचे ने भाजपा की तरक्की को जन्म दिया था. विवादित ढांचा विध्वंस वैसे तो गैर कानूनी था लेकिन सियासी गुणा-भाग में ये भाजपा की तरक्की के शुरुआती रास्ते का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ. और इस विध्वंस में पूरा हाथ शिवसेना का था. ये बात शिवसेना खुद कहती रही है और भाजपा भी स्वीकारती है.
मुलायम सिंह की पूर्वर्ती सपा सरकार (SP Government) ने रामभक्तों/कार सेवकों पर जो गोलियां चलवायीं थी, ढांचा तोड़े जाने को इसका बदला माना गया.
और 1990 से 1992 तक की घटनाओं के बाद अयोध्या मामला भावनात्मक होकर देश का बड़ा मुद्दा हो गया था.

इसी के साथ भाजपा की रीढ़ बनकर राम मंदिर की इच्छाओं, तमन्नाओं, चर्चाओं, भावनाओं ने भाजपा का कद बढ़ाना शुरु कर दिया था.
इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि ढांचा टूटने ने अयोध्या मसले को वृहद रूप दिया और भाजपा के विजय रथ को गति मिली. किंतु इस घटना को अग्रिम पंक्ति में आकर अंजाम देने वाले महाराष्ट्र के शिवसैनिक थे.
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस बात का हलफनामा तक दिया था कि ढांचे को कोई हानि नहीं पंहुचायी जायेगी. संवैधानिक दायरे में सिर्फ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन होगा.
लेकिन संजोग तो देखिए कि न्यायालय ने जिस दिन विवादित ढांचे को राम जन्म भूमि होने का फैसला सुना दिया उसके दूसरे दिन महाराष्ट्र से भाजपा की सत्ता हाथ से निकल गयी.

राम मंदिर के मुद्दे पर वो महाराष्ट्र (Maharashtra) जिसने भाजपा को सत्ता के शिखर पर पंहुचाया था राम जन्म भूमि सिद्ध हो जाने के बाद महाराष्ट्र से भाजपा का सत्ता से पत्ता साफ हो गया.
अयोध्या मसले पर राम जन्म भूमि आंदोलन ने भाजपा की तरक्की के रास्ते को पैदा किया थे. इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता या घटना बाबरी ढांचा तोड़ा जाना था. ये सब स्वीकारते हैं कि ढ़ाचा तोड़ने में मुख्य भूमिका महाराष्ट्र के शिव सैनिकों की थी. वरना भाजपा ने इस बात का शपथ पत्र दिया था कि सिर्फ प्रदर्शन होगा. ढांचे को कोई नुकसान नहीं होगा।. राम मंदिर आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाली भाजपा के दो सबसे बड़े सपने पूरे हो गये. पहले भाजपा देश के सबसे बड़े राजनीति दल के रूप में उभरी और हिन्दुत्व की ताकत ने एकजुट होकर लोकतान्त्रिक तरीके से भाजपा को सत्ता की चाबी सौंपी.
दूसरा और सबसे अहम सपना भी पूरा हो गया. वो भी लोकतांत्रिक और संविधानिक तरीके से.

अयोध्या की विवादित भूमि पर न्यायालय का फैसला राम मंदिर के पक्ष में आ गया. अब भव्य राम मंदिर भी बन जायेगा. इन खुशियों पर ना जाने किसकी नजर लग गई, राम मंदिर बनने के एलान के साथ भाजपा-शिवसेना का रिश्ता टूट गया. देश का इतिहास रहा है कि बड़ी खुशी एक बड़ा ग़म दे जाती है. देश आजाद होने की खुशियां मना रहा था कि देश को बंटवारे का ग़म मिल गया. राम मंदिर का सपना साकार हो गया. लेकिन इसके संघर्ष के दो साथियों की राहें अलग होने की घटना दुख दे गई.

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नवेद शिकोह

लेखक कई लोकप्रिय अखबारों और पत्रिकाओं से जुड़े हैं और पेशे से पत्रकार हैं

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