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‘सेक्स’ के बारे में क्या सोचते हैं भारतीय!

पिछले कुछ वर्षों में हमारे आस पास की दुनिया बहुत तेजी से बदली है. इंटरनेट और स्मार्टफोन ने सबकुछ एक झटके में बदल दिया है. इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय यौन परिदृश्य पर पड़ा है.

हिंदी की प्रमुख पत्रिका इंडिया टुडे का सत्रहवां सेक्स सर्वेक्षण हाल ही में प्रकाशित हुआ है. पत्रिका की रिपोर्ट बताती है कि भले ही दुनिया ने कितनी भी तरक्की कर ली हो. हमारे आस पास की भौतिक चीजें चाहे कितनी भी बदल गई हों. लेकिन आज भी सेक्स के मामले में ज्यादातर भारतीयों की राय पुरानी घिसी पिटी धारणाओं पर ही आधारित है.

इस सर्वेक्षण से जो एक प्रमुख बात सामने निकल कर आती है, वो ये है कि वर्तमान समय में उन लोगों को ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है जिनके बच्चे किशोरावस्था की ओर बढ़ रहे हैं.

भारतीय सामाजिक व्यवस्था में सेक्स को हमेशा ही एक टैबू माना गया है. परिवारों में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना लगभग न के बराबर है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमारे आस पास की दुनिया बहुत तेजी से बदली है. इंटरनेट और स्मार्टफोन ने सबकुछ एक झटके में बदल दिया है. इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय यौन परिदृश्य पर पड़ा है.

आदिकाल से ही इंसान के दिमाग में यौन फंतासियां जन्म लेती रही हैं. इंटरनेट और मोबाइल के आने के बाद इंसानी दिमाग में उपजने वाली ऐसी कोई यौन कल्पना नहीं है जो सिर्फ एक क्लिक पर आपके सामने न उपलब्ध हो. अब आपको सेक्स से जुड़ी बातों के लिए छुप छुप कर कोई पत्रिका पढ़ने की जरूरत नहीं है. सब कुछ बेहद ही व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध है. वो भी आपकी सुविधा के अनुसार. जब चाहे, जहां चाहे.

इंडिया टुडे के सर्वेक्षण में कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने आई हैं. गर्भ निरोधकों की सहज उपलब्धता ने पहली बार सेक्स करने की औसत उम्र घटाई है. ज्यादातर लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहली बार यौन अनुभव किशोरावस्था में ही हो गया था.
इसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं.

हालांकि इंटरनेट की सहज उपलब्धता से पोर्न देखने की लत में भी इजाफा हुआ है. पोर्न की लत से अपराध में भी इजाफा हुआ है.
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय यौन परिदृश्य भले ही काफी बदल गया हो लेकिन कुछ मामलों में आज भी ज्यादातर लोगों की सोच में विशेष परिवर्तन नहीं आया है. कौमार्य आज भी ज्यादातर लोगों के लिए बेहद अहम है.

इंटरनेट की सहज उपलब्धता दोधारी तलवार बनकर उभरी है. एक तरफ जहां तमाम जिज्ञासाओं का समाधान बेहद आसानी से उपलब्ध है. वहीं दूसरी तरफ सेक्सटॉर्शन के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है.

भले ही पिछले साल अगस्त में सर्वोच्च न्यायालय ने एलजीबीटी समुदाय को भी अपने यौन रुझान को खुलकर अभिव्यक्त करने का अधिकार दे दिया हो. लेकिन अभी भी ज्यादातर भारतीय समलैंगिक यौन रुझानों को खुलकर जताने में संकोच करते हैं.

इस बीच सबसे ज्यादा बदलाव छोटे शहरों में देखने को मिला है. छोटे शहरों में लोग अपने यौन व्यवहारों को लेकर ज्यादा खुले हैं.
ये लोग यौन व्यवहार में नए नए प्रयोग करने में नहीं हिचकते.

इस सर्वेक्षण में शामिल 40 प्रतिशत लोगों ने माना है कि वे अपने यौन जीवन से पूरी तरह खुश या संतुष्ट नहीं हैं.
इस सर्वे से एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हुई है कि भारतीय समाज पहले की अपेक्षा ज्यादा खुला है. लोग नैतिक वर्जनाओं को परे करके आगे बढ़ तो रहे हैं लेकिन फिर कुछ मामलों में आज भी समाज की सोच केवल धारणाओं पर आधारित है.

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