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अब और कितने दिनों तक चलेगा मंदिर-मस्जिद विवाद

विवाद नहीं लोगों को शांति की है दरकार

9 नवंबर, वो तारीख जब सदियों से चले आ रहे अयोध्या मसले पर फैसला आया. फैसला राम मंदिर के पक्ष में था कि जो विवादित जमीन है वहां राम मंदिर बनेगा जिसके लिए पहले एक ट्रस्ट बनाया जाएगा. वहीं मस्जिद के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ की जमीन दी जाएगी. जिसके बाद जो मसला सालों यूं कहें कि सदियों पहले चला था वो अब 5 एकड़ के जमीन के ऊपर आकर रुक गया.

अब ये सवाल कि क्यों रुक गया..ऱुकता भी क्यों ना ये मंदिर-मस्जिद विवाद है भाई.. इतनी जल्दी खत्म होने वाला विवाद है क्या?  सदियों से चला आ रहा ये सवाल जिसका जवाब जाने कितनी पीढ़ियों नहीं दे पाईं. इसका जवाब सुप्रीम कोर्ट ने इतनी आसानी से कैसे ढूंढ लिया. इतनी लंबी लड़ाई को 1000-1500 पन्नों के फैसले में कैसे खत्म कर दे. ये तो चलना चाहिए.

शायद अनंत काल तक.. अभी और बवाल होगा. होना चाहिए, मस्जिद के लिए केवल 5 एकड़ जमीन ये तो बहुत नाइंसाफी है भाई. तो क्या करना होगा. इसपर एआइएमआएएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी साहब जो हैदराबाद से सांसद भी हैं और जो खुद को सच्चा मुस्लमान भी बतलाते हैं. उनका कहना है कि “मैं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इस बात से सहमत हूं कि हमें 5 एकड़ जमीन के ऑफर को लौटा देना चाहिए. हमें खैरात की जरूरत नहीं.”  और जहां तक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बात करें तो उनके सेक्रेटरी ज़फरयाब जिलानी कहते हैं कि हम सुप्रीम कोर्ट के बहुत से तथ्यों से संतुष्ट नहीं हैं पर हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले की इज्जत करते हैं. इसके आगे हमारे बोर्ड इस फैसले पर पहले विचार करेगा और उसके बाद हम ये निर्णय लेंगे कि इसपर आगे हमारी क्या कानूनी कार्यवाई होगी. हम समिक्षा याचिका डालेंगे या नहीं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के इस बयान पर ओवैसी ने समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें खैरात नहीं चाहिए. ओवैसी साहब के इस बयान के बाद ये तो साफ है कि उन जैसे लोग इस तरह के मुद्दों को शायद कभी खत्म ही नहीं करना चाहते. ऊपर से ये एक पॉलिटिकल मुद्दा है जो हर बार चुनाव में उन जैसे नेताओं को कुछ फायदे पहुंचाता है. और अगर ये विवाद खत्म हो गया तो उन्हें फिर जनता के आम मुद्दें जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, घर, स्वास्थ्य इन सब पर बात करना होगा और जाहिर सी बात है कि फिर काम पर ध्यान देना होगा तो वो ये विवाद कैसे खत्म कर सकते हैं जी..

फैसला मंदिर के पक्ष में जरूर आया है. जिसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने लिया है. जाहिर है उन्होंने हर पहलुओं को समझा होगा, जाना होगा, हर सबूतों-गवाहों को जांचा-परखा होगा. ऐसी ही तो नहीं उन्होंने सदियों से चली आ रहे इस विवाद पर फुल स्टॉप लगाने की कोशिश की है. अब इस फैसले से बहुत से लोग तो खुश हैं, संतुष्ट भी हैं, उन्हें नहीं चाहिए मंदिर-मस्जिद विवाद, जिसकी आग में ना जाने कितनी पीढ़ियां जल कर राख हो गई. नहीं चाहिए वो नारे जो एक-दूसरे के बीच दूरी पैदा करती हो. चाहिए तो बस खुशी, आने वाले पीढ़ी के लिए शिक्षा, सुख-सुविधाएं एक बेहतर कल जिसमें कोई विवाद ना हो. हो तो बस शांति लेकिन जो इस विवाद के जीतेजी तो संभव नहीं है.

 

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